लेस्बियन लडकियों की चुदाई का नजारा



हैल्लो दोस्तों, हमारे शहर में बहुत सारी पढ़ाई के लिये कोचिंग है जहाँ पर दूर दूर से बच्चे अपनी पढ़ाई के लिए आते है, इनमें बहुत सी लड़कियाँ भी होती है और उन लोगों को रहने के लिए कमरे किराये पर लेने पड़ते है। दोस्तों हम लोगों को भी अपने नये मकान जिसको हमने पूरा का पूरा हिस्सा उनके लिए ही बनवाया है वो किराए पर देना था तो इसलिए हमारे पास बहुत सारे बच्चे कमरे देखने आई l

लेकिन कई लोगो के आने और वापस चले जाने के बाद दो लड़कियाँ हमारे घर पर आई जिनको हमने अपने रूम को किराए पर दे दिया। इसमें मेरे घर वालों की मर्जी थी और वो भी यही चाहते थे, क्योंकि एक तो लड़कियों से घर में रौनक बनी रहती है और उनका व्यहवार सभी से ठीक रहता है l

उनकी कोई गलत आदत या हरकते भी बहुत कम होती है और गुंडागर्दी का कोई लफड़ा भी नहीं होता, इसलिए यह सभी बातें सोच समझकर मैंने घरवालों ने उन दोनों लड़कियों जिनका नाम कविता और सविता था उनको किराए पर हमारे घर में रख लिया। दोस्तों मुझे बिल्कुल भी पता नहीं था कि वो चेहरे से मासूम, सीधी-साधी दिखने वाली क्या गुल खिलाने वाली है? वो सब मुझे भी कुछ दिनों के बाद में पता चला।

दोस्तों में हर रात को छुप छुपकर उनके बेडरूम के अंदर का नज़ारा देखता रहता और बहुत मौज मस्ती करता। में दिन भर उनके साथ घूमता भी और उनके काम भी करता, लेकिन असल बात तो में उनका काम करना चाह रहा था। में चाहता था कि कब इन दोनों कुँवारी कच्ची कलियों को मसल सकूं और उनकी चूत में अपने लंड की मोहर लगाकर अपनी छाप उनके जिस्म पर छोड़ दूँ.

जिसको वो पूरी जिंदगी याद रखे। दोस्तों वो दोनों ही लड़कियाँ बड़े ही गदराए बदन की थी। जैसे वो कोई संगमरमर की मूरत और उनका बदन किसी साँचे में ढला हुआ था, फूली हुई बड़ी बड़ी गोल चूचियां और कमर भी मस्त, एकदम गोल गहरी नाभि और मस्त भारी गांड जो हर आदमी को दीवाना बना दे।

उनको देखकर हर कोई उनकी तरफ आकर्षित हो जाए और उसी समय उनकी चुदाई के लिए तैयार हो जाए। एक दिन मैंने देखा कि कविता ने बाहर से एक सब्ज़ी वाले से लंबे वाले बेंगन खरीदे थे और तभी मेरा माथा ठनका और फिर में मन ही मन सोचने लगा कि अब इस बेंगन का क्या होगा? क्योंकि वो दोनों तो सुबह शाम दिन हर समय खाना हमारे साथ खाती है और उनको खाना बनाने की कोई जरूरत ही नहीं थी।

फिर यही बात सोचकर मैंने अपना पूरा दिन भर जैसे तैसे इधर उधर काट लिया, लेकिन में रात होते होते उस बेंगन का उपयोग देखना चाहता था इसलिए में बहुत उत्सुक था और इसलिए में रात को जब सविता लौटकर आए तो मैंने रूम में अपने उस गुप्त छेद से उनके कमरे के अंदर झाँककर देखा कि वहां पर अब क्या चल रहा है?

दोस्तों चलिए में अब आपको भी सैर करवा लाता हूँ कि जब दो जवान लड़कियाँ रूम में रात काटती है तो उनके बीच में क्या क्या होता है? में अब आपको कमरे के अंदर की बातचीत और नज़ारा सुनाता हूँ। फिर सविता बोली है मेरी जान ज़रा मालिश कर देl आप ये कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

कब से मेरा सारा बदन दुख रहा है और यह बात कहकर वो बेड पर जाकर लेट गई और कविता ने उसकी टी-शर्ट को ऊपर करके पूरा उतार दिया, जिसकी वजह से मुझे उसकी सफेद रंग की ब्रा दिखाई देने लगी और उसमे बंद उसके बड़े बड़े बूब्स मुझे हिलते हुए नज़र आए वो बहुत मस्त नजारा था, जिसको देखकर मेरी आखें फटी की फटी रह गई। अब कविता बोली की क्यों आज बहुत दर्द हो रहा है क्या?

तो सविता ने जवाब दिया, हाँ यार जल्दी से तेल डालकर मालिश कर दे और कविता उसके कहने पर तुरंत तेल गरम करके एक कटोरी में ले आई और अब तक सविता की सलवार को भी उसने तुरंत उतार दिया था। इस काम में उसने ज्यादा समय नहीं लगाया, उसके हाथों में बहुत तेज स्पीड थी।

फिर उसके बाद मैंने देखा कि ब्रा और पेंटी में लेटी हुई सविता की वो अब तेल से मालिश करने लगी और अब कविता सविता के गोरे गोरे स्तन जो ब्रा के ऊपर से उभर रहे थे उनके ऊपर हाथ ले जाती और वो उसके ऊपर तेल का हाथ लगाती। यह सब करने में सविता को भी बड़ा मज़ा आ रहा था।

अब वो बोली कि इस ब्रा को भी तो निकाल और थोड़ा सा तेल नीचे भी लगा। यह बात सुनकर कविता ने नीचे से पेंटी को उतार दिया और अब उसने सविता की चूत को पूरा फैलाकर उस पर दो बूँद तेल टपका डाला और अब उसने अपनी उंगलियों से उभरी हुई चूत की मसाज करना शुरू कर दिया। अब कविता ने कहा कि देख सविता तेरी झांटे भी तो कितनी बढ़ आई है क्या में इनको भी साफ कर दूँ?

सविता बोली कि हाँ कर दे यार और अब मैंने देखा कि कविता शेविंग क्रीम, ब्रश और रेज़र लेकर चूत के ऊपर की झांटो को साफ करने लगी, वो उसकी जाँघो पर चढ़कर बैठ गई और फिर उसने चूत के ऊपर क्रीम लगाई और ब्रश से रगड़कर झाग बना डाले।

उसके बाद उसने अपने एक हाथ से चूत को टाइट करके रेज़र से झांटो को साफ कर दिया और खर खर की हल्की आवाज़ के साथ रेज़र ने सविता की चूत के आस पास की झांटो का बड़ा जंगल साफ करके बिल्कुल चिकना मैदान बना दिया था, जिसके बीच में उसकी पतली चूत एक क्रिकेट के मैदान की तरह नज़र आ रही थी।

फिर कविता बोली कि जान स्टेडियम तैयार है और मैदान भी तैयार है, लेकिन अब मेच खेलने वाला खिलाड़ी कहाँ है? तभी उसके मज़ाक से सविता खीज उठी क्या यार तुझे तो बस हमेशा मज़ाक ही सूझता है? कविता बोली कि आज मैंने लंबे वाले बेंगन खरीदे है मेरी रानी, वो हमारी प्यास बुझाने में ठीक रहेंगे।

फिर सविता बोली कि पहले यहाँ पर मेरी मसाज तो कर ले, प्यास उसके बाद में बुझा देना और अब कविता एक बार फिर से सविता की चूत को धीरे धीरे सहलाने लगी, जिससे उसको बड़ा आराम आने लगा। फिर उसके बाद में मैंने देखा कि कविता ने ऊपर दोनों बूब्स पर अपने हाथों को कसकर गोल पकड़ बनाई और उसे दबाकर बड़ा कर डाला।

फिर कविता ने सविता के निप्पल को अपने मुहं में लेकर चूसना शुरू किया और उसके बाद कविता ने सविता की दोनों जाँघो को फैलाकर अपने दोनों हाथों की उंगलियों से उसकी चूत को फैलाकर लेट गई और अब वो अपनी जीभ को चूत के अंदर डालकर सविता की चूत का रसपान करने लगी l आप ये कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

वो अब उसके दाने को अपने मुहं में लेकर अपनी जीभ से हिलाने लगी और चूस रही थी और उसकी एक उंगली सविता की चूत के छेद में अंदर बाहर आ जा रही थी।

फिर कुछ देर में गरम होने पर सविता ने कविता को अपनी बाहों में खींच लिया और फिर वो उसके ऊपर सवार हो गई। सविता ने कविता की चिकनी चूत को उसके पज़ामे से बाहर निकाला और उस पर अपने थूक का लेप लगाकर उसकी चूत में अपनी जीभ को डालना शुरू किया।

अब सविता कविता की रसमलाई जैसी चूत को अपनी जीभ से बहुत खुरदुरा करके चाट रही थी और सविता कविता की गांड में भी बार बार अपना थूक लगा रही थी और अपनी जीभ से उसकी गांड को भी चाट रही थी। उसके बाद सविता फिर उठकर फ्रिज तक चली गई और वो पेप्सी की एक बोतल निकालकर ले आई और अब सविता ने कविता की चूत को फैलाकर उसमे पेप्सी गिराई और ठंडी पेप्सी को चूत में भरकर अपनी जीभ से चाटना शुरू कियाl

वो उसके निप्पल को भी पेप्सी से गीला कर चुकी थी और अब निप्पल से कोल्ड ड्रिंक को पीकर उसने बहुत मज़ा लिया। फिर कुछ देर बाद कविता को झाड़कर अंदर जाकर फ्रिज में रखी दूध पर जमी मलाई निकालकर लानी पड़ीl

जिसे कविता ने सविता की चूत पर लेप समान मल दिया और फिर उस मलाई को उसने अपनी जीभ से बड़े मज़े ले लेकर खा लिया और मलाई चाटने से चूत और निखर गई थी और चूत का गुलाबी भाग बार बार दोनों लड़कियों का मुझको दिखता, जिससे मेरा लंड खड़ा होकर टाईट हो चुका था।

अब कविता सविता की चूत की दोनों फांको को चिरकर अपनी जीभ से उसमे अंदर बाहर मलाई का लेप घुमा रही थी और चूत के छोड़े हुए पानी को लप लप कर मलाई के साथ पी रही थी। अब कविता और सविता दोनों नंगी होकर एक दूसरे के साथ लेटी हुई थी और दोनों एक दूसरे पर उल्टा होकर लेटी हुई थी l

दोनों ही एक दूसरे की चूत में जीभ को डाल रही थी कविता पीठ के बल नीचे लेटी हुई थी और वो अपने दोनों पैरों को मेरे सीक्रेट छेद जिससे में उनको देख रहा था उस तरफ किये थी, जिससे उसकी चूत के दर्शन मुझे भी साफ साफ हो रहे थे, जबकि सविता मेरी तरफ अपना सर किये थी और उसके दोनों पैर कविता के सर की तरफ थे, जिससे सविता ऊपर से कविता की चूत को अपनी जीभ से ऊपर से नीचे की तरफ चाट रही थी l

कविता दोनों गोरी गोरी जाँघो को दूर दोनों दिशा में किये थी, वो चूत को धर्मशाला के दरवाजे की तरह खोले हुई थी, जिसमें सविता बहुत अच्छे से अपनी जीभ को डालकर चूत को चाट रही थी और वो उसकी चूत के गुलाबी रंग के दाने को अपने होंठो में दबाकर खींच और चूस रही थी, जिसकी वजह से कविता चिल्ला उठती कुतिया साली यह क्या कर रही है, क्या मेरी चूत को कच्चा ही खा जाएगी, थोड़ा ध्यान से कर।

फिर सविता कहती की अब ज्यादा नखरा मत दिखा, यहाँ तो में हूँ जो तुझे अभी छोड़ दूंगी, लेकिन अगर तुझे कोई जानवर सा पति मिल गया तो वो तेरी कहाँ कोई बात सुनेगा, तू पड़ी चिल्लाती रहना और कोई तुझे नहीं बचाने वाला और ना तू उस ताबड़तोड़ चुदाई के बाद किसी को अपना दर्द बता सकती है। आप ये कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

फिर कुछ देर बाद कविता ने उठकर एक बेंगन लाकर सविता को भी दे दिया, जिसको देखकर वो बहुत खुश हुई और अब वो दोनों एक साथ बेड पर सीधे लेटकर मेरी तरफ वाली दिशा में अपनी चूत को फैलाकर लंबा मोटा बेंगन अंदर डाल रही थी और पूरा अंदर जाने के बाद इधर उधर घुमाकर धीरे धीरे बाहर निकाल रही थी।

उसके बाद दोबारा एक ज़ोर के झटके के साथ पूरा अंदर डाल रही थी जिसको देखकर लगता था कि वो उस बेंगन से अपनी बच्चेदानी को छूने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उनको कोई भी दर्द नहीं था, क्योंकि बेंगन बहुत चिकने थे इसलिए वो बहुत ज्यादा फिसलकर अंदर बाहर हो रहे थे और वो उनको एक मोटे लंबे लंड की तरह मज़ा दे रहा था।

दोस्तों वो उस बेंगन से अपनी अपनी चूत को चोदने के साथ साथ वो एक दूसरे के बूब्स भी दबा रही थी और निप्पल को भी पीना नहीं भूलती। दोस्तों मुझको वो सब कुछ देखकर उन दोनों की बेबसी पर बड़ा तरस आया, लेकिन में क्या करता?

यह तो उनका हर रोज़ का काम था, वो ऐसे ही किसी भी चीज से अपनी चूत को चोदकर शांत कर देती और में दूसरी तरफ खड़ा अपने तनकर खड़े लंड को हिलाता। उसके बाद में बाथरूम में जाकर उनको सोचकर मुठ मारकर अपने लंड को ठंडा करता। दोस्तों उन दोनों की भी ठीक वैसी ही हालत थी वो कैसे भी अपनी चूत का पानी बाहर निकालना चाहती थी और यह काम अब उनकी आदत बन चुका था और में उनके मज़े लेता था।

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